🚧This site is under construction — data is currently being added and may be incomplete or change.🚧
🕉

Sanatan Dharma

सनातन धर्म — Hindu Scripture Knowledge Base

Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 6 - Verse 41

Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 6 · Verse 41

brahmavarta-puranabrahmavarta-purana-section-1chapter-6ocr-import

Sanskrit Original

जगम देवी स्वगंञ्य दर्वा तस्म श्युभं । ग्राजगाम महाराजा स्वगृहहृष्टमानसः ग्रागत्य कथयामास वृतान्तं पृत्रहेतुकूम्‌ । ३६ ॥ इतना इस प्रकारसे कहकर सूने | इसरदेवीने उस बालक को ष्य तत्तिवरँनम्‌ ] { ६२२ हे नारद ! वहां समस्त नर श्रौर नारिर्या श्रघ्यन्त सन्तुष्ट हो गये थे श्रौर उस पुत्र के निमित्त सवत्र मङ्गल करायाथा । देवीका पूजन कराया था श्रौर ब्राह्मणों को धन का दान दिया था । }३७ ॥ केन्या साच भगवती कर्यपस्यच मानसी । तेनेयं मनसादेवी मनसा या च दीव्यति । ३८ ॥ मनसा ध्यायते या वा परमात्मानमीश्वरम्‌ 1 तेन सा मनसादेवी योगेन तेन दीव्यति । ३६ ॥ । श्रात्मारामा चसा देवी वष्णवी सिद्धयोगिनी । त्रियुग तपस्तप्त्वा कृष्णस्य परमात्मनः । 1 ८० ॥ जरतृकार शरीरञ्च दृष्ट्रा यां क्षीरमीर्वरः । गोपीपतिनमिचक्र जरत्‌कारुरिति प्रथः ॥ ४१ ॥

No translation available yet.