Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 6 - Verse 25
Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 6 · Verse 25
Sanskrit Original
राधाके वामां भागं से वह् महा लक्ष्मी हुई थी । वहु रस्यं राधिक्यानिम् | , { ३४ ३४६ ॥ ` ब्रहमगैवत्त पुराणम् ४० हरगोरीसंकदे राधोषाख्यानम् । इस भ्रध्यायमे हर गौरी सम्वाद में राधा के उपाख्यान का निरूपण क्या गयाहै । पार्नतीने कहा--उसदेवीको सुदामाका शाप क्यों प्राप्त हुप्राथा { उस सेवक सुदामा ने श्रपने श्रभीष्टदेव श्री कृष्णए की कामिनी.कोकंसे शापदे दिया था । १ । श्री भगवान ने.कहा-हे देवी ! म इस श्रत्यन्त श्रद्धत रहस्य को.बताता ह तुम ८ = ~ य सित् ज ~ त ~ _ ~ १.०. द हरगौरीसंवादै. .] ` [ ३४७४ ६४०८ |[ | तब्रह्मगैवत्तंपुराणम् विरजालिगणास्तंत्र मवविहलकाराः । १८ ॥ प्रययुः शरणं साध्वीं विरजां तत्क्षणं भिया । गौलोकेसासरिद्रं पा बभूव शोलकन्यके । १६ । , . , कोटरियोजनविस्तीर्णा दीघं शतगुणा तथा । दरगरीसंवादे `] [ ३४९ गोलोके वेष्टयामास परिखेव मनोहरा ॥ २० ॥ बभूवुः क्षुद्रनयञ्च तदान्या मोप एव च । सर्वा नदयस्तदंशाश्च प्रतिविद्वेषु सुन्दरि । २१ ॥ इमे सप्तसमुद्रारच विरजानन्दना भवि । ग्रथागत्य भगवती राधा रासेदवरी पथ ॥ २२ ॥ हे प्रिये ! उसी सुमनो माली रथके द्वारा वह् गई थी । कृष्ण ५० | | ` ब्रह्मगैवत्तपुराशग् सुदामा भत् सयामास तामेव कुष्णसचतिघौ । कर दाशसदापसादेवीसुदामानं सुरेश्वरी । ॥ २५ ॥
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