Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 6 - Verse 3
Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 6 · Verse 3
brahmavarta-puranabrahmavarta-purana-section-1chapter-6ocr-import
Sanskrit Original
कमता चिरजीवौ चक्षणायुश्चस्य~+म शा । ३८ ॥ कम रा{काोट्किल्पायुः क्ष णायुश्वस्वकमे णा । जीवसञ्न्वास्मात्रायुगम् म्रद्युःस्वकप णा 11३६ इत्येवं कथितंशवं मया स्वञ्वमृन्दरि । कमर्णे सतो भत्ता गच्छं वत्से यथासुखम् ॥ ४० हू सावित्री ! तुमं कहाँ ना रहीहो? इस मानवीशरीरको २६ | [ ब्रह्मवेवरत्तदुराणम् कमं से वकुण्ठ लोक की प्राप्ति होतीदहैश्रीर निरामय गोलोक धामको स्वामी श्रपने कमं के प्रभावसे मृतहौ गयाहै । इसलिये है वत्से ! तुम प्रपने घर सुख पूवक वापिस चली जाश्रो ||४० ॥ । 0 । क २८--कमेविपाके साषिच्री प्रश्नः । कि कम्मे उद्भवेत् केनकोवा तद्धतुरेवच ॥ ३ ॥
No translation available yet.