🚧This site is under construction — data is currently being added and may be incomplete or change.🚧
🕉

Sanatan Dharma

सनातन धर्म — Hindu Scripture Knowledge Base

Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 4 - Verse 59-60

Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 4 · Verse 59-60

brahmavarta-puranabrahmavarta-purana-section-1chapter-4ocr-import

Sanskrit Original

सवं संकथय । मासु विधाता चन्द्रशेखरम्‌ । ब्रह्मा शिवश्च तं : साद्ध' व्रेकुण्ठञ्चजगाम ह्‌ । 1५० ॥ इस कै श्रनन्तर उसके साथ वहु दानव श्रपते ग्राश्रममें श्राकर एक व क ध = प न द उ सव कि 17 2 १५८० पया , तानक ~न तुलस्यां सह्‌ शंखचूडस्य मेलनं कथोपकथनञ्च | [ २३५ सुदुलंमं पर धाम जरामृच्युहूर परम्‌ । श्रन्दर जाने के लिये निवेदन करियाथा) उन द्वारपालो ने ब्रह्माको म्रन्दर प्वेदा करने कौश्राज्ञादेदी थीश्रौर फिरब्रहयाने भीतर प्रवद क्रियाथा । ॥ ५२-५४ ॥ । एवच्च षौडशद्रारान्निरीक्ष्य कमलोद्‌नधः । द्वः सार्धं तानतीत्य प्रविवेश हुशेः सभाम्‌ । ५५ २३६ ] [ त्रद्वा्त॑वत्त बुराणम देवणिभिः परिवुलां पाषंदैरय चतुभ"जैः तुलस्यां सह्‌ कषंसच्‌इस्य मेलन कथोपकथनश्च | [ २३७ जोकि स्वस्य शरीर सकफे भावोंकै ज्ञाता थे, ब्रह्मा के वचन को सुनकर हसते दष बह्मा से प्म मनोहुर रहुर्य कहा था ॥ ५९-६० ॥

No translation available yet.