Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 3 - Verse 51
Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 3 · Verse 51
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Sanskrit Original
कोटिचन्द्रभ्रमामृष्टश्रीयुक्तमक्तविग्रहा । श्रीकृष्ण भक्तदास्यैकदाच्रिका सवे सम्पदाम् 1४६९ श्रन्य इनका ज्ञान नहीं होता दहै 1४७ सहसो में सुरेन्द्र श्रौर मुनि पुङ्ख ग्रवतारे च वाराहे वृकभानुसुता चया । यतुपादपद्मसस्पश्चपवित्रा च वसुन्धरा ॥ ५० ॥ बरह्मादिभिरहष्टा या सवंहष्टा च भारते । लीरत्नसारसंभूता कष्णवक्षःस्थलस्थिता ॥ तथा घने नवघने लोला सौदामिनी मने ॥ ५१ ॥
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