Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 1 - Verse 36
Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 1 · Verse 36
brahmavarta-puranabrahmavarta-purana-section-1chapter-1ocr-import
Sanskrit Original
९ष्टिप्रकारवणंनम् ] । [ ९५ द्वारा श्रत्यन्त प्रयत्न धै लुप्त श्रौर भग्न इस मोहिनी को रसातल से लाकर उद्धार किया था । १५ ॥ एतान् सृष्ट्वा किञ्चकार तन्मे व्याख्यातुमहंसि 11१७ एतान् सृष्ट्वा जगामासौ सुरम्यं रासमण्डलम् । एतेः समेतो भगवानतीवकमनीयकम् ॥ १८ ॥ रम्याणांकल्पवृक्षाांमध्येऽती वमनोहुरम् । ६६ | [ ब्रह्यवैवत्त पुराणम सृष्टिप्रकारवणंनम् | | ६७ उस राघा ने गोविन्द से सम्भाषण किया श्रौर फिर वष्ट स्मित से युष होती हुई श्रपने स्वामी के मूख कमल का निरीक्षण करती हई श्रेष्ठ रत्न $= | [ ब्रह्यवेवत्तं पुराणम् सृष्टिश्रकारवणंनम् | ` ६९ श्राविभू ता सिहुपंक्तिमहाबलपराक्रमा ॥ ३६ ॥
No translation available yet.