Uttaraparvan - Chapter 117 - Verse 23
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 117 · Verse 23
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Sanskrit Original
जिस दिन भद्रा हो उस दिन उपवास करना चाहिये । यदि रात्रिके समय भद्राहोतोदो दिनतक एकभुक्त व्रत करना चाहिये । एक प्रहरके बाद भद्रा हो तो तीन प्रहरतक उपवास करना चाहिये अथवा एकभुक्तं रहना चाहिये । स्त्री अथवा १-मुखे तु घटिकाः पञ्च दवे कण्ठे तु सदा स्थिते । हदि चैकादश प्रोक्ताश्चतस्नो नाभिमण्डले ॥ कयां पञ्चैव विज्ञेयास्तिस्रः पुच्छे जयावहाः । मुखे कार्यविनाशाय ग्रीवायां धननाशिनी ॥ हदि प्राणहरा ज्ञेया नाभ्यां तु कलहावहा । कय्यामर्थपरिभ्रंशो विष्टिपुच्छे ध्रुवो जयः ॥
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