Uttaraparvan - Chapter 20 - Verse 20
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 20 · Verse 20
bhavisya-puranabhp-4-uttaraparvanchapter-20source-backed-epub-extract
Sanskrit Original
अङ्कुरित हरी घाससे निर्मित भगवती हरकालीकी मूर्तिं स्थापित करे ओर गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, मोदक आदि नैवेद्य तथा भति- भातिके उपचारे देवीका पूजन करे । रात्रिमे गीत-नृत्य आदि उत्सवकर जागरण करे ओर देवी हरकालीको इस मन््रसे प्रणाम करेहरकर्मसमुत्पन्ने हरकाये हरप्रिये । मां त्राहीशस्य मूर्तिस्थे प्रणतोऽस्मि नमो नमः ॥
Original Source: View source ↗
No translation available yet.