Pratisargaparvan (part 2) - Chapter 235 - Verse 5-6
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 235 · Verse 5-6
Sanskrit Original
उपाध्याय पतञ्जलिमुनि रहते थे । वे वेद- वेदाङ्ग - तत्त्वज्ञ एवं गीता-शास्त्र-परायण थे । वे विष्णुके भक्त, सत्यवक्ता एवं व्याकरण-महाभाष्यके रचयिता भी माने गये है । एक समय वे शुद्धात्मा अन्य तीर्थमिं गये । काशीमें उनका देवीभक्त कात्यायनके साथ शास्त्रार्थ हुआ । एक वर्षतक शास्त्रार्थं चलता रहा, अन्तमें पतञ्जलि पराजित हो गये । इससे लज्नित होकर उन्होने सरस्वतीकी इस प्रकार आराधना कीनमो देव्ये महामूर्यै सर्वमूरत्यै नमो नमः । शिवायै सर्वमाङ्कल्यै विष्णुमाये च ते नमः ॥ त्वमेव श्रद्धा बुद्धिस्त्वं मेधा विद्या शिवंकरी । शान्तिर्वाणी त्वमेवासि नारायणि नमो नमः ॥
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