Pratisargaparvan (part 2) - Chapter 30 - Verse 10-14
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 30 · Verse 10-14
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Sanskrit Original
। जो श्रेष्ठ व्यक्ति यज्ञमें ब्रह्मा आदि देवताओंका यजन करता है ओर रोचना आदिसे उनका अर्चन एवं तर्पण आदि करता है तथा । त्रिगुणैक्यस्वरूपायै तुरीयायै नमो नमः ॥ । ब्रह्ममातर्नमस्तुभ्यं साहं कारपितामहि ॥ । विद्यायै शुद्धसत्त्वायै लक्ष्म्यै सत्तवरजोमयि ॥ । काल्यै सततवतमोभूत्यै नमो मातर्नमो नमः ॥ स्त्रियै शुद्धरजोमूर्त्यै नमस्त्ैलोक्यवासिनि । नमो रजस्तमोमूर्त्यै दुगव च नमो नमः ॥
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