bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-200
Shlokas (1)
+ Add ShlokaUttaraparvan - Chapter 200 - Verse 7
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 200 · Verse 7
अब मँ कपासपर्वतके दानकौ विधि बता रहा हूं । यह सभी दानमे श्रेष्ठ ओर समस्त देवताओंको परम प्रिय है । अपने कुटुम्बका उद्धार करनेके लिये उपयुक्त देश-काल ओर धनको प्राप्तकर श्रद्धापूर्वक इस महादानको यलपूर्वक करना चाहिये । बीस भार रूईसे बना हुआ कपासपर्वत उत्तम, दस भारसे बना हुआ मध्यम ओर पाँच भारसे बना हुआ अधम
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