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Sanatan Dharma

सनातन धर्म — Hindu Scripture Knowledge Base

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Uttaraparvan - Chapter 179 - Verse 10-11

Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 179 · Verse 10-11

०५ चाहिये । विधिपूर्वक दिक्पाल-होम, आघारआज्यभाग-हवन, ग्रहयाग तथा व्याहतियोंसे भी हवन करना चाहिये । हवन आदिके अनन्तर किसी पुण्य पर्वमें स्नानादिसे पवित्र होकर फल, अक्षत, वस्त्र, पुष्प, धूप आदिसे कल्पलताकी अर्चना करनी चाहिये । तदनन्तर प्रदक्षिणा कर इन मन्त्रोंसे उसकी प्रार्थना करनी चाहियेनमो नमः पापविनाशिनीभ्यो ब्रह्माण्डलोकेश्चरपालनीभ्यः । आशाशताधिक्यफलप्रदाभ्यो दिग्भ्यस्तथा कल्पलतावधूभ्यः ॥ या यस्य शक्तिः परमा प्रदिष्टा वेदे पुराणे सुरसत्तमस्य । तां पूजयामीह परेण साप्रा सामे शुभं यच्छतु तां नतोऽस्मि ॥

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