bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-152
Shlokas (1)
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Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 152 · Verse 15
वाराहके द्वारा कहे गये तिलधेनुदानकी विधि बता रहा हू । जिससे दाता ब्रह्महत्यादि महापातकं तथा सभी उपपातकोसे मुक्त हो जाता है ओर स्वर्गमें निवास करता हे । पहले पृथ्वीको गोबरसे लीपकर उसपर काला मृगचर्म तथा उसके चारों ओर कुश बिका ले । तदनन्तर उसपर गायको आकृतिके रूपमे तिलको राशि फैला ले अर्थात्
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