bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-142
Shlokas (1)
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Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 142 · Verse 17-18
सभी कार्योकी सिद्धि करनेवाले शान्तिप्रद कोटिहोमकी विधि बता रहा हँ जिसके करनेसे ब्रह्महत्यादि पातक छूट जाते ह । सभी उत्पात शान्त हो जाते हैँ । साथ ही आरोग्य एवं सुखकी भी प्राति होती है । ' इसका विधान इस प्रकार हैसबसे पहले शुद्ध मुहूर्त देखकर देवालय, नदीके तटपर, वनमें अथवा घरमे कोटिहोम करना चाहिये । सर्वप्रथम वेदवेत्ता ब्राह्मणका वरण कर गन्ध, अक्षत, पुष्प, माला, वस्त्र, आभूषण आदिसे उनका पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करनी चाहियेत्वं नो गतिः पिता माता त्वं गतिस्त्वं परायणः । त्वत्प्रसादेन विप्र्षं सर्वं मे स्यान्मनोगतम्
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