bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-133
Shlokas (1)
+ Add ShlokaUttaraparvan - Chapter 133 - Verse 15
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 133 · Verse 15
शंकरके पार्षद दोला ज्ुलाने लगे तथा जया ओर विजया दोनों सखि्यां चंवर डलाने ल्गीं । उस समय पार्वतीजीने बहुत ही मधुर स्वरम गीत गाया, जिससे शिवजी आनन्दमग्र हो गये । गन्धर्व गीत गाने लगे, अप्सरा नाचने लगीं ओर चारण १-या यस्य जन्तोः प्रकृतिः शुभा वा यदि वेतरा । स तस्यामेव रमते दुष्कृते सुकृते तथा ॥
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