bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-094
Shlokas (2)
+ Add ShlokaUttaraparvan - Chapter 94 - Verse 33
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 94 · Verse 33
समभ्युद्धर वासुदेव । अनन्तरूपे विनियोजितात्मा ह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते ॥
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Uttaraparvan - Chapter 94 - Verse 60-61
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 94 · Verse 60-61
अनन्त वृद्ध ब्राह्मणके रूपमे प्रकट हो गये ओर पुनः उन्हें अपने दिव्य चतुर्भुज विश्चरूपका दर्शन कराया । भगवानूका दर्शनकर कोँडिन्य अत्यन्त प्रसन्न हो गये ओर उनकी प्रार्थना करने लगे तथा अपने अपराधोके लिये क्षमा मांगने लगेपापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः । पाहि मां पुण्डरीकाक्ष सर्वपापहरो भव ॥ अद्य मे सफलं जन्म जीवितं च सुजीवितम्
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