bhavisya-purana-bhp-4-uttaraparvan-ch-041
Shlokas (1)
+ Add ShlokaUttaraparvan - Chapter 41 - Verse 8
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 41 · Verse 8
एक नये बोँसके पात्रमे बालू लेकर घर आये । फिर वस्त्रका मण्डप बनाकर उसमें दीप प्रज्वलित करे । मण्डपमें वह बोंसका बालुकामय पात्र स्थापित कर उसमे बालुकामयी, तपोवन-निवासिनी भगवती ललितागौरीका ध्यानकर पूजन करे ओर उस दिन उपवास रहे, तदनन्तर चम्पक, करवीर, अशोक, मालती, नीलोत्पल, केतको तथा तगरपुष्प--इनमेंसे प्रत्येककी १०८ या २८ पुष्पाञ्जलि अक्षतोके साथ निग्रलिखित मन्त्रसे देललिते ललिते देवि सोख्यसौभाग्यदायिनि । या सोभाग्यसमुत्पन्ना तस्यै देव्यै नमो नमः ॥
Translation not available.