bhavisya-purana-bhp-2-2-madhyamaparvan-part-2-ch-020
Shlokas (1)
+ Add ShlokaMadhyamaparvan (part 2) - Chapter 20 - Verse 23
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · Chapter 20 · Verse 23
वरुणदेवका आवाहन करे । वरुणको आठ मुद्रा दिखाये । गायत्रीसे स्नान कराये तथा पाद्य, अर्घ्य, पुष्पाञ्जलि आदि उपचारोँसे वरुणका पूजन करे । ग्रहों, लोकपालों, दस दिक्पालों तथा पीठपर ब्रह्मा, शिव, गणेश ओर पृथ्वीका गन्ध, चन्दन आदिसे पूजन करे । पीठके ईशानादि कोणोमें कमला, अम्बिका, विश्वकर्मा, सरस्वती तथा पूर्वादि द्वारोमें उनचास मरुद्रणोका पूजन करे । पीठके बाहर पिशाच, राक्षस, भूत, बेताल आदिकी पूजा करे । कलशपर सूर्यादि नवग्रहोका आवाहन एवं ध्यानकर पाद्य, अर्ध्य, गन्ध, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य तथा बलि आदिद्वारा मन्त्रपूर्वक उनकी पूजा करे ओर उनकी पताका उन्हें निवेदित करे । त्वं च धारय मां नित्यं पवित्रमासनं कुरु ।
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