Gana ९२.१
Samaveda Kauthuma Aranyaka Gana · अथ सतमः खण्डः · Verse ९२꠰१
Sanskrit Original
याे꣢꣯रयंवाे꣯राऽ३य꣢न्तमाः꠱ याेद्युना꣣ ऽ२३४इद्यूर्꣥ ꠰ ना꣢꣯व꣡तमाऽ२३ः꠰ साे꣢मा᳐स्सू꣣ ऽ२३४ता꣥:꠰ सा꣢꣯इ꣡न्ताये꣢ ऽ᳐३꠱ अ꣢स्त᳐स् वा꣣ ऽ२३४धा꣥꠱ प꣣ते꣢ऽ᳐३꠰ मा꣡ऽ२३४दाः꠰ उ꣥हुवाऽ६हा꣥ उ꠰ वा꠱ अ꣡स्꠱ (द॰ ४ ꠰ प॰ ११ ꠰ मा॰ ८ ) १४ (तै ꠰ १५५) १꠰ वष्णाेीणस् वरयांस, पचानुगानम् ꠰ पचानां वायुरनुष्टुबन्ः꠱ हा꣡꣯उहाे꣯हाइ꠰(िः)꠰ अ꣢न्त꣡ रक्ष꣢ ꣳस꣡वर्वंज꣢ग꠰न् ा꣡ ꠰(द्वे िः)꠰ परा꣯त् पर मै꣯ रय꣢꠰ ता꣡꠰(द्वे- द्वः)꠰परा꣯त् परमै꣯ रय꣢꠰ त꠰ अाै꣡꣯हाेवा꣣꣯हा꣢उ꠰ वा꠱ ए꣯꠰ यज्ञाे꣡꣯ द꣢वाे꣡꣯मू꣢꣯द्धार्꣡꣯ दे꣯व꣢मा꣡꣯दनाे꣢꣯घमाेर्꣡꣯ (द॰ २४꠰ प॰ १९ ꠰ मा॰ ८ ) १५ (धै ꠰ १५६) २꠰ हा꣡꣯उहाे꣯हाइ꠰(िः)꠰ अ꣢न्त꣡ रक्꣢ꣳꣳ꣢स꣡वर्वंज꣢ग꠰न् ा꣡ ꠰(द्वे िः)꠰ परा꣯त्परमै꣯ रय꣢꠰ ता꣡꠰(द्वे द्वः)꠰ परा꣯त् परमै꣯ रय꣢꠰ त꠰ अाै꣡꣯हाेवा꣣꣯हा꣢उ꠰ वा꠰ ए꣯꠰ पृथव्य꣡न् तरक्ष꣢न् ाै꣡꣯ रा꣯पᳲक꣢िनदा꣡꣯त्सन्धु꣢ रा꣡꣯पाे꣯म꣢रु꣡ ताे꣯मा꣢꣯दयन्तां꣯ घमाेर्꣡꣯ज्याे꣯ ितः꠱ (द॰ २५ ꠰ प॰ १९ ꠰ मा॰ ८ ) १६ (भै ꠰ १५७) ७३ ॐ ppn ३꠰ हा꣡꣯उहाे꣯हाइ꠰(िः)꠰ अ꣢न्त꣡ रक्ष꣢ ◌ँस꣡वर्वंज꣢ग꠰न् ा꣡ ꠰(द्वे िः)꠰ परा꣯त् परमै꣯ रय꣢꠰ ता꣡꠰(द्वे- िः)꠰ द꣢वाे꣡꣯मू꣯द्धार्꣯ नꣳसमै꣯र꣢यन्꠰ हाे꣡ये꣢ऽ᳐३꠰ हाेऽ२३४वा꣥꠱ य꣡शाे꣯घ꣢माेर्꣡꣯ज्याे꣯ ितः꠰ यशस्समै꣯ र꣢यन्꠰ हाे꣡ये꣢ऽ᳐३꠰ हाेऽ२३४वा꣥꠱ ते꣡꣯जाे꣯घ꣢माेर्꣡꣯ज्याे꣯ ितः꠰ ते꣯जस्समै꣯ र꣢यन्꠰ हाे꣡ये꣢ऽ᳐३꠰ हाेऽ२३४वा꣥꠱ स꣡वघर्꣢माेर्꣡꣯ज्याे꣯ ितः꠰ सवस्समै꣯ र꣢यन्꠰ हाे꣡ये꣢ऽ᳐३꠰ हाेऽ२३४वा꣥꠱ज् याे꣡꣯ ितघर्꣢माेर्꣡꣯ज्याे꣯ ितः꠰ज् याे꣯ ितस्समै꣯ र꣢यन्꠰ हाे꣡ये꣢ऽ᳐३꠰ हाेऽ२३४५वाऽ६५६꠱ घ꣢म्ाेर्꣡ घ꣢म्ाेर्꣡꣯ज् याे꣯ ितः꠱ (द॰ ३६ ꠰ प॰ ३५ ꠰ मा॰ १६ ) १७ (ङू ꠰ १५८)
Edition: SanskritDocuments / Pallasena P. Narayanaswami, January 2025
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