Brahma Khanda (Volume 1 source) - Chapter 4 - Verse 30
Brahma Vaivarta Purana Vol 1 (Internet Archive OCR; DLI / Sanskrit Sansthan) · 4 · Verse 30
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Sanskrit Original
स गत्वोवाच तुणं त वटमूलस्थमीरवरम. । श खेचूडस्य वचनं तदीयं यत् परिच्छदम. । २० ॥ पुष्पदन्त ने कहा--हं राजेन्द्र ! मै पुष्पदन्त नाम वाला शिव का २४४ |] [ ब्रह्मववत्तपुराणम् हं । श्रव तुम चले जाग्र । \१६ ॥ वहू पष्पदन्त शीघ्ष्टी श्राकर वट के मल ९२ मे स्थित शिव से शब्रचृड फे जो बचन क्षटहए थे उनके उने कट् दिया कै कम न = ~, ४ रिवेन सह् बंखचूडस्य युदा पष्पदन्तप्रर्णम, ] ` [ २४५ काले सुजिति सरष्टा च पाता पाति च कालतः संहर्ता संहरेत् कालेप्नज्वरन्तिक्रमेरते \ । २६ व्रह्मकिष्णुश्िवादीनामीश्वरः प्रकृतैः परः । सष्या पाता च संहर्ता स॒ कृस्नेन सवंदा ॥ ३० ॥
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