Uttaraparvan - Chapter 178 - Verse 31
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 178 · Verse 31
bhavisya-puranabhp-4-uttaraparvanchapter-178source-backed-epub-extract
Sanskrit Original
के साथ हरिचन्दनवृक्षको स्थापित करे । पुनः रेशमी वस्त्रसे वेष्टित, ईख, पुष्पमाला ओर फलोँसे संयुक्त आठ पूर्णं कलशोंको चारों ओर स्थापित करे । अग्निप्रणयन करके वृक्षका अधिवासन करे । अनेक प्रकारके धान्य तथा -भक्ष्य-भोज्य नैवेद्योंको भी स्थापित करे । चारों ओर दीपमाला प्रज्वलित कर दे । अनन्तर कल्पवृक्षको पूजा कर प्रार्थना करे कामदस्त्वं हि देवानां कामवृक्षस्ततः स्मृतः । मया सम्पूजितो भक्त्या पूरयस्व मनोरथान्
Original Source: View source ↗
No translation available yet.