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Sanatan Dharma

सनातन धर्म — Hindu Scripture Knowledge Base

Uttaraparvan - Chapter 84 - Verse 16

Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 84 · Verse 16

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Sanskrit Original

का निर्माण कराना चाहिये । इस प्रकार गौ ओर बलछडेकी कल्पना करके उन्हें शेत एवं महीन वस्त्रसे आच्छादित कर दे । फिर घीसे उनके मुखको, सीपसे कानोंकी, गन्नेसे पैरोँको, शेत मोतीसे नेत्रकी, शत सूतसे नाडियोंकी, श्त कम्बलसे गल-कम्बलकी, लाल रंगके चिहसे पीठकी, शेत रगके मृगपुच्छके बालोसे रोर्एेकी, मृगिसे दोना भोहोंकी, मक्खनसे दोनों स्तनोंकी, रेशमके धागेसे पृक, कसासे दोहनीकी, इन्द्रनीलमणिसे ओंखोकी तारिकाओंकी, सुवर्णसे सीगके आभूषणोकी, चदीसे खुरोकी ओर नाना प्रकारके फलोँसे नासापुोकी रचना कर धूप, दीप, आदिद्वारा उनकी अर्चना करेके यों प्रार्थना करे१-विशोका दुःखनाशाय विशोका वरदास्तु मे । विशोका चास्तु संतत्यै विशोका सर्वसिद्धये ॥

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