Uttaraparvan - Chapter 18 - Verse 23-24
Bhavishya Purana (Gita Press Gorakhpur EPUB derivative from Internet Archive) · 18 · Verse 23-24
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Sanskrit Original
नमक, चीनी तथा गुड निवेदित करना चाहिये । पद्मासन लगाकर सूर्यास्ततक देवीके सम्मुख बैठा रहे । अनन्तर रुद्राणीको प्रणाम कर यह मन्त्र कहेवेदेषु सर्वशास्त्रेषु दिवि भूमौ धरातले । दृष्टः श्रुतश्च बहुशो न शक्त्या रहितः शिवः ॥ त्वं शक्तिस्त्वं स्वधा स्वाहात्वं सावित्री सरस्वती । पतिं देहि गृहं देहि वसु देहि नमोऽस्तु ते ॥
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